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विदुर नीति • अध्याय 3 • श्लोक 22
विदुर उवाच एवं कृतपणौ क्रुद्धौ तत्राभिजग्मतुस्तदा । विरोचनसुधन्वानौ प्रहादो यत्र तिष्ठति ॥
विदुर जी कहते हैं - इस तरह बाजी लगाकर, परस्पर क्रुद्ध हो विरोचन और सुधन्वा दोनों उस समय वहां गये, जहाँ प्रह्लादजी थे।
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