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विदुर नीति • अध्याय 3 • श्लोक 2
विदुर उवाच । सर्वतीर्थेषु वा स्नानं सर्वभूतेषु चार्जवम् । उभे एते समे स्यातामार्जवं वा विशिष्यते ॥
विदुर जी बोले - कोमलता का बर्ताव, ये दोनों एक समान हैं, अथवा कोमलता के बर्ताव का सब तीर्थो में स्नान, और सब प्राणियों के साथ विशेष महत्व है।
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