पितापि ते समासीनमुपासीतैव मामधः ।
बालः सुखैधितो गेहे न त्वं किं चन बुध्यसे ॥
तुम्हारे पिता प्रह्लाद, नीचे बैठकर ही मेरी सेवा किया करते हैं। तुम अभी बालक हो, घर में सुख से पले हो, अतः तुम्हें इन बातों का कुछ भी ज्ञान नहीं है।
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