सुधन्वोवाच पितापुत्रौ सहासीतां छ्वौ विप्रौ क्षत्रियावपि ।
वृद्धौं वैश्यौ च शूद्रौ च न त्वन्यावितरेतरम् ॥
सुधन्वा ने कहा - पिता और पुत्र एक साथ एक आसन पर बैठ सकते हैं, दो ब्राह्मण, दो क्षत्रिय, दो वृद्ध, दो वैश्य, और दो शुद्र भी एक साथ बैठ सकते हैं, किन्तु दूसरे कोई दो व्यक्ति परस्पर एक साथ नहीं बैठ सकते।
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