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विदुर नीति • अध्याय 3 • श्लोक 13
सुधन्वा च समागच्छत् प्रहलादि केशिनीं तथा। समागतं द्विजं दृष्ट्वा केशिनी भरतर्वभ । प्रत्युत्थायासनं तस्मै पाद्यमव्य ददौ पुनः ॥
भरतश्रेष्ठ! सुधन्वा प्रहाद कुमार विरोचन, और केशिनी के पास आया। ब्राह्मण को आया देख, केशिनी उठ खड़ी हुई और उसने उसे आसन, पाद्य, और अर्ध्य निवेदन किया।
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