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विदुर नीति • अध्याय 2 • श्लोक 86
आनृशंस्यादनुक्रोशाद्योऽसौ धर्मभृतां वरः । गौरवात्तव राजेन्द्र बहून्क्लेशांस्तितिक्षति ॥
राजेन्द्र! धर्मधारियों में श्रेष्ठ युधिष्ठिर, दया, सौम्यभाव, तथा आपके प्रति गौरव बुद्धि के कारण, बहुत कष्ट सह रहा है।
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