राजा लक्षणसम्पन्नस्त्रैलोक्यस्यापि यो भवेत् ।
शिष्यस्ते शासिता सोऽस्तु धृतराष्ट्र युधिष्ठिरः ॥
महाराज धृतराष्ट्र! जो राज लछणों से सम्पन्न होने के कारण, त्रिभुवन का भी राजा हो संकता है, वह आपका आज्ञाकारी, युधिष्ठिर ही इस पृथ्वी का शासक होने योग्य है।
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