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विदुर नीति • अध्याय 2 • श्लोक 83
सेयं बुद्धिः परीता ते पुत्राणां तव भारत । पाण्डवानां विरोधेन न चैनाम् अवबुध्यसे ॥
भरतश्रेष्ठ! आपके पुत्रो की वह बुद्धि पाण्डवों के प्रति विरोध से व्याप्त हो गयी है, आप इन्हें पहचान नहीं रहे हैं।
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