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विदुर नीति • अध्याय 2 • श्लोक 8
अनुबन्धानवेक्षेत सानुबन्धेषु कर्मसु । सम्प्रधार्य च कुर्वीत न वेगेन समाचरेत् ॥
किसी प्रयोजन से किये गये कर्मों में, पहले प्रयोजन को समझ लेना चाहिये। खूब सोच-विचारकर काम करना चाहिये, जल्दबाजी से किसी काम का आरम्भ नहीं करना चाहिये।
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