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विदुर नीति • अध्याय 2 • श्लोक 78
संरोहति शरैर्विद्धं वनं परशुना हतम् । वाचा दुरुक्तं बीभत्सं न संरोहति वाक्क्षतम् ॥
बाणों से बींधा हुआ, तथा फरसे से काटा हुआ वन भी पनप जाता है, किंतु कटु वचन कहकर, वाणी से किया हुआ भयानक घाव नहीं भरता।
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