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विदुर नीति • अध्याय 2 • श्लोक 77
अभ्यावहति कल्याणं विविधा वाक्सुभाषिता । सैव दुर्भाषिता राजन्ननर्थायोपपद्यते ॥
राजन्! मधुर शब्दों में कही हुई बात, अनेक प्रकार से कल्याण करती है, किंतु वही यदि कटु शब्दों में कही जाय, तो महान् अनर्थ का कारण बन जाती है।
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