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विदुर नीति • अध्याय 2 • श्लोक 75
हिंसा बलमसाधूनां राज्ञां दण्डविधिर्बलम् । शुश्रूषा तु बलं स्त्रीणां क्षमागुणवतां बलम् ॥
दुष्ट पुरुषों का बल है हिंसा, राजाओं का बल है दण्ड देना, स्त्रियों का बल है सेवा, और गुणवानों का बल है क्षमा।
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