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विदुर नीति • अध्याय 2 • श्लोक 73
आत्मज्ञानमनायासस्तितिक्षा धर्मनित्यता । वाक्चैव गुप्ता दानं च नैतान्यन्त्येषु भारत ॥
भारत! आत्मज्ञान, अक्रोध, सहनशीलता, धर्मपरायणता, वचनकी रक्षा, तथा दान - ये गुण अधम पुरुषो में नहीं होते।
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