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विदुर नीति • अध्याय 2 • श्लोक 72
अनसूयार्जवं शौचं सन्तोषः प्रियवादिता । दमः सत्यमनायासो न भवन्ति दुरात्मनाम् ॥
गुणों में दोष न देखना, सरलता, पवित्रता, सन्तोष, प्रिय वचन बोलना, इन्द्रियदमन, सत्यभाषण, तथा अच्चलता - ये गुण दुरात्मा पुरुषों में नहीं होते।
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