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विदुर नीति • अध्याय 2 • श्लोक 70
असन्त्यागात्पापकृतामपापांस् तुल्यो दण्डः स्पृशते मिश्रभावात् । शुष्केणार्द्रं दह्यते मिश्रभावात् तस्मात्पापैः सह सन्धिं न कुर्यात् ॥
पापाचारी दुष्टों का त्याग न करके, उनके साथ मिले रहने से, निरपराध सज्जनों को भी उनके समान ही दण्ड प्राप्त होता है, जैसे सूखी लकड़ी में मिल जाने से गीली भी जल जाती है, इसलिये दुष्ट पुरुषों के साथ कभी मेल न करे।
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