मुख्य पृष्ठ शास्त्र परिचय ऐप इंस्टॉल करें
विदुर नीति • अध्याय 2 • श्लोक 7
तथैव योगविहितं न सिध्येत्कर्म यन्नृप । उपाययुक्तं मेधावी न तत्र ग्लपयेन्मनः ॥
इसी प्रकार अच्छे उपायों का उपयोग करके, सावधानी के साथ किया गया कोई कर्म, यदि सफल न हो, तो बुद्धिमान् पुरुष को उसके लिये मन में ग्लानि नहीं करनी चाहिये।
पूरा ग्रंथ पढ़ें
विदुर नीति के सभी अध्याय और श्लोकों को उनके अर्थ और व्याख्या सहित पढ़ने के लिए Krishjan ऐप इंस्टॉल करें। ऐप में आपको संरचित अध्याय, आसान नेविगेशन और ऑफलाइन पढ़ने की सुविधा मिलती है।

सभी अध्याय उपलब्ध

विदुर नीति के 18 अध्याय और सभी श्लोक एक ही स्थान पर।

सरल अर्थ

प्रत्येक श्लोक के साथ स्पष्ट हिंदी अनुवाद।

ऑफलाइन पढ़ें

इंटरनेट के बिना भी ग्रंथ पढ़ें।
Krishjan
धर्म का अन्वेषण
ऐप इंस्टॉल करें