तथैव योगविहितं न सिध्येत्कर्म यन्नृप ।
उपाययुक्तं मेधावी न तत्र ग्लपयेन्मनः ॥
इसी प्रकार अच्छे उपायों का उपयोग करके, सावधानी के साथ किया गया कोई कर्म, यदि सफल न हो, तो बुद्धिमान् पुरुष को उसके लिये मन में ग्लानि नहीं करनी चाहिये।
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