राजन्! जिस प्रकार सूक्ष्म छेद वाले जाल में फँसी हुई, दो बड़ी-बड़ी मछलियाँ, मिलकर जाल को काट डालती हैं, उसी प्रकार ये काम और क्रोध, दोनों विशिष्ट ज्ञान को लुप्त कर देते है।
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