राजन्! मनुष्य का शरीर रथ है, बुद्धि सारथि है, और इन्द्रियाँ इसके घोड़े हैं। इनको वश में करके सावधान रहने वाला चतुर एवं धीर पुरुष, काबू में किये हुए घोड़ों से रथी की भाँति, सुखपूर्वक यात्रा करता है।
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