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विदुर नीति • अध्याय 2 • श्लोक 58
वश्येन्द्रियं जितामात्यं धृतदण्डं विकारिषु । परीक्ष्य कारिणं धीरमत्यन्तं श्रीर्निषेवते ॥
इन्द्रियों तथा मन को जीतने वाले, अपराधियों को दण्ड देने वाले, और जाँच-परखकर काम करने वाले, धीर पुरुष की लक्ष्मी अत्यन्त सेवा करती हैं।
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