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विदुर नीति • अध्याय 2 • श्लोक 53
ऐश्वर्यमदपापिष्ठा मदाः पानमदादयः । ऐश्वर्यमदमत्तो हि नापतित्वा विबुध्यते ॥
यों तो पीने का नशा आदि भी नशा ही है, किंतु ऐश्वर्य का नशा तो बहुत ही बुरा है, क्योंकि ऐश्वर्य के मद से मतवाला पुरुष, श्रष्ट हुए बिना होश में नहीं आता।
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