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विदुर नीति • अध्याय 2 • श्लोक 51
प्रायेण श्रीमतां लोके भोक्तुं शक्तिर्न विद्यते । दरिद्राणां तु राजेन्द्र अपि काष्ठं हि जीर्यते ॥
राजन्! संसार में धनियों को प्रायः भोजन करने की शक्ति नहीं होती, किन्तु दरिद्रों के पेट में काठ भी पच जाते हैं।
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