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विदुर नीति • अध्याय 2 • श्लोक 5
तस्माद्वक्ष्यामि ते राजन्भवमिच्छन्कुरून्प्रति । वचः श्रेयः करं धर्म्यं ब्रुवतस्तन्निबोध मे ॥
इसलिये राजन्! जिससे समस्त कौरवों का हित हो, वही बात आपसे कहुँगा। मैं जो कल्याणकारी एवं धर्मयुक्त वचन कह रहा हूँ, उन्हें आप ध्यान देकर सुनें।
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