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विदुर नीति • अध्याय 2 • श्लोक 48
शीलं प्रधानं पुरुषे तद्यस्येह प्रणश्यति । न तस्य जीवितेनार्थो न धनेन न बन्धुभिः ॥
पुरुष में शील ही प्रधान है, जिसका बही नष्ट हो जाता है, इस संसार में उसका जीवन, धन, और बन्धुओं से कोई प्रयोजन सिद्ध नहीं होता।
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