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विदुर नीति • अध्याय 2 • श्लोक 41
न कुलं वृत्ति हीनस्य प्रमाणमिति मे मतिः । अन्त्येष्वपि हि जातानां वृत्तमेव विशिष्यते ॥
मेरा ऐसा विचार है, कि सदाचार से हीन मनुष्य का केवल ऊँचा कुल मान्य नहीं हो सकता, क्योंकि नीच कुल में उत्पन्न मनुष्यों का भी सदाचार श्रेष्ठ माना जाता है।
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