भूयांसं लभते क्लेशं या गौर्भवति दुर्दुहा ।
अथ या सुदुहा राजन्नैव तां विनयन्त्यपि ॥
राजन! जो गाय बड़ी कठिनाई से दुने देती हैं, वह बहुत हेश उठाती हैं, किंतु जो आसानी से दुध देती है, उसे लोग कष्ट नहीं देते।
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