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विदुर नीति • अध्याय 2 • श्लोक 32
अप्युन्मत्तात्प्रलपतो बालाच्च परिसर्पतः । सर्वतः सारमादद्यादश्मभ्य इव काञ्चनम् ॥
निरर्थक बोलने वाले, पागल तथा बकवाद करनेवाले बच्चे से भी, सब ओर से उसी भाँति तत्व की बात ग्रहण करनी चाहिये, जैसे पत्थरों में से सोना ले लिया जाता है।
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