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विदुर नीति • अध्याय 2 • श्लोक 29
अथ सन्त्यजतो धर्ममधर्मं चानुतिष्ठतः । प्रतिसंवेष्टते भूमिरग्नौ चर्माहितं यथा ॥
जो राजा धर्म को छोड़ता, और अधर्म का अनुष्ठान करता है, उसकी राज्यभूमि आग पर रखे हुए चमड़े की भाँति संकुचित हो जाती है।
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