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विदुर नीति • अध्याय 2 • श्लोक 22
कांश्चिदर्थान्नरः प्राज्ञो लभु मूलान्महाफलान् । क्षिप्रमारभते कर्तुं न विघ्नयति तादृशान् ॥
जिनका मूल (साधन) छोटा, और फल महान् हो, बुद्धिमान् पुरुष उनको शीघ्र ही आरम्म कर देता है, वैसे कामों में वह विघ्न नहीं आने देता।
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