यस्तु पक्वमुपादत्ते काले परिणतं फलम् ।
फलाद्रसं स लभते बीजाच्चैव फलं पुनः ॥
परन्तु जो समय पर पके हुए फल को ग्रहण करता है, वह फल से रस पाता है, और उस बीज से पुनः फल प्राप्त करता है।
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