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विदुर नीति • अध्याय 1 • श्लोक 98
अष्टौ पूर्वनिमित्तानि नरस्य विनशिष्यतः । ब्राह्मणान्प्रथमं द्वेष्टि ब्राह्मणैश्च विरुध्यते ॥
विनाश के मुख में पड़ने वाले मनुष्य के आठ पूर्वचिह्न हैं - प्रथम तो वह ब्राह्मणों से द्वेष करता है, फिर उनके विरोधका पात्र बनता है।
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