राजन्! नीरोग रहना, ऋणी न होना, परदेश में न रहना, अच्छे लोगों के साथ मेल होना, अपनी वृत्ति से जीविका चलाना, और निडर होकर रहना - ये छः मनुष्य लोक के सुख हैं।
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