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विदुर नीति • अध्याय 1 • श्लोक 84
षडिमान्पुरुषो जह्याद्भिन्नां नावमिवार्णवे । अप्रवक्तारमाचार्यमनधीयानमृत्विजम् ॥
उपदेश न देनेवाले आचार्य, मन्त्रोच्यारण न करने वाले होता, रक्षा करने में असमर्थ राजा, कटु वचन बोलनेवाली स्त्री, ग्राम में रहने की इच्छा वाले ग्वाले, तथा वनमें रहने की इच्छा वाले नाई - इन छः को उसी भाँति छोड़ दे.
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