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विदुर नीति • अध्याय 1 • श्लोक 8
विदुरोऽहं महाप्राज्ञ सम्प्राप्तस्तव शासनात् । यदि किं चन कर्तव्यमयमस्मि प्रशाधि माम् ॥
महाप्राज्ञ! मैं विदुर हूँ, आपकी आज्ञा से यहाँ आया हूँ। यदि मेरे करने योग्य कुछ काम हो तो मैं उपस्थित हूँ, मुझे आज्ञा कीजिये।
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