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विदुर नीति • अध्याय 1 • श्लोक 78
चत्वारि कर्माण्यभयङ्कराणि भयं प्रयच्छन्त्ययथाकृतानि । मानाग्निहोत्रं उत मानमौनं मानेनाधीतमुत मानयज्ञः ॥
चार कर्म भय को दूर करने वाले हैं, किन्तु वे ही यदि ठीक तरह से सम्पादित न हों, तो भय प्रदान करते हैं। वे कर्म हैं - आदर के साथ अग्निहोत्र, आदरपूर्वक मौन का पालन, आदरपूर्वक स्वाध्याय, और आदर के साथ यज्ञ का अनुष्टान।
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