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विदुर नीति • अध्याय 1 • श्लोक 70
हरणं च परस्वानां परदाराभिमर्शनम् । सुहृदश्च परित्यागस्त्रयो दोषा क्षयावहः ॥
दूसरे के धन का हरण, दूसरे की स्त्री का संसर्ग, तथा सुहृद् मित्र का परित्याग, ये तीनों ही दोष, नाश करने वाले होते हैं।
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