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विदुर नीति • अध्याय 1 • श्लोक 69
त्रय एवाधना राजन्भार्या दासस्तथा सुतः । यत्ते समधिगच्छन्ति यस्य ते तस्य तद्धनम् ॥
राजन्! तीन ही धन के अधिकारी नहीं माने जाते - स्त्री, पुत्र, तथा दास। ये जो कुछ कमाते हैं, वह धन उसी का होता है जिसके अधीन ये रहते हैं।
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