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विदुर नीति • अध्याय 1 • श्लोक 67
त्रयो न्याया मनुष्याणां श्रूयन्ते भरतर्षभ । कनीयान्मध्यमः श्रेष्ठ इति वेदविदो विदुः ॥
भरतश्रेष्ठ! मनुष्यों की कार्य सिद्धि के लिये उत्तम, मध्यम और अधम - ये तीन प्रकार के न्यायानुकूल उपाय सुने जाते हैं, ऐसा वेदवेत्ता विद्वान् जानते हैं।
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