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विदुर नीति • अध्याय 1 • श्लोक 58
द्वाविमौ ग्रसते भूमिः सर्पो बिलशयानिव । राजानं चाविरोद्धारं ब्राह्मणं चाप्रवासिनम् ॥
बिल में रहने वाले, मेढक आदि जीवों को जैसे साँप खा जाता है, उसी प्रकार यह पृथ्वी, शत्रु से विरोध न करने वाले राजा, और परदेश-सेवन न करने वाले ब्राह्मण, इन दोनों को खा जाती है।
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