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विदुर नीति • अध्याय 1 • श्लोक 53
एकः क्षमावतां दोषो द्वितीयो नोपलभ्यते । यदेनं क्षमया युक्तमशक्तं मन्यते जनः ॥
क्षमाशील पुरुषों में एक ही दोष का आरोप होता है, दूसरे की तो सम्भावना ही नहीं है। वह दोष यह है कि क्षमाशील मनुष्य को लोग असमर्थ समझ लेते हैं।
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