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विदुर नीति • अध्याय 1 • श्लोक 52
एकमेवाद्वितीयं तद्यद्राजन्नावबुध्यसे । सत्यं स्वर्गस्य सोपानं पारावारस्य नौरिव ॥
राजन्! जैसे समुद्र के पार जाने के लिये नाव ही एकमात्र साधन है, उसी प्रकार स्वर्ग के लिये सत्य ही एकमात्र सोपान है, दूसरा नहीं, किंतु आप इसे नहीं समझ रहे हैं।
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