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विदुर नीति • अध्याय 1 • श्लोक 50
एकं विषरसो हन्ति शस्त्रेणैकश्च वध्यते । सराष्ट्रं स प्रजं हन्ति राजानं मन्त्रविस्रवः ॥
विष का रस एक (पीने वाले) को ही मारता है, शस्त्र से एक का ही वध होता है, किंतु मन्त्र का फूटना राष्ट्र और प्रजा के साथ ही, राजा का भी विनाश कर डालता है।
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