मुख्य पृष्ठ शास्त्र परिचय ऐप इंस्टॉल करें
विदुर नीति • अध्याय 1 • श्लोक 49
एकया द्वे विनिश्चित्य त्रींश्चतुर्भिर्वशे कुरु । पञ्च जित्वा विदित्वा षट्सप्त हित्वा सुखी भव ॥
एक (बुद्धि) से दो (कर्तव्य और अकर्तव्य) का निश्चय करके चार (साम, दान, दण्ड, भेद) से तीन (शत्रु, मित्र, तथा उदासीन) को वश में कीजिये। पाँच (इन्द्रियों) को जीतकर छः (सन्धि, विग्रह, यान, आसन, द्वैधीभाव और समाश्रयरूप) गुणों को जानकर तथा सात (स्त्री, जूआ, मृगया, मद्य, कठोर वचन, दण्ड की कठोरता, और अन्याय से धन का उपार्जन) को छोड़कर सुखी हो जाइये।
पूरा ग्रंथ पढ़ें
विदुर नीति के सभी अध्याय और श्लोकों को उनके अर्थ और व्याख्या सहित पढ़ने के लिए Krishjan ऐप इंस्टॉल करें। ऐप में आपको संरचित अध्याय, आसान नेविगेशन और ऑफलाइन पढ़ने की सुविधा मिलती है।

सभी अध्याय उपलब्ध

विदुर नीति के 18 अध्याय और सभी श्लोक एक ही स्थान पर।

सरल अर्थ

प्रत्येक श्लोक के साथ स्पष्ट हिंदी अनुवाद।

ऑफलाइन पढ़ें

इंटरनेट के बिना भी ग्रंथ पढ़ें।
Krishjan
धर्म का अन्वेषण
ऐप इंस्टॉल करें