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विदुर नीति • अध्याय 1 • श्लोक 48
एकं हन्यान्न वाहन्यादिषुर्मुक्तो धनुष्मता । बुद्धिर्बुद्धिमतोत्सृष्टा हन्याद्राष्ट्रं सराजकम् ॥
किसी धनुर्धर वीर के द्वारा छोड़ा हुआ बाण, सम्भव है एक को भी मारे या न मारे। मगर बुद्धिमान द्वारा प्रयुक्त की हुई बुद्धि, राजा के साथ-साथ सम्पूर्ण राष्ट्र का विनाश कर सकती है।
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