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विदुर नीति • अध्याय 1 • श्लोक 47
एकः पापानि कुरुते फलं भुङ्क्ते महाजनः । भोक्तारो विप्रमुच्यन्ते कर्ता दोषेण लिप्यते ॥
मनुष्य अकेला पाप करता है, और बहुत-से लोग उससे मौज उड़ाते हैं। मौज उड़ाने वाले तो छूट जाते हैं, पर उसका कर्ता ही दोष का भागी होता है।
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