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विदुर नीति • अध्याय 1 • श्लोक 4
द्वाःस्थ उवाच । विदुरोऽयमनुप्राप्तो राजेन्द्र तव शासनात् । द्रष्टुमिच्छति ते पादौ किं करोतु प्रशाधि माम् ॥
द्वारपाल ने जाकर कहा, महाराज! आपकी आज्ञा से, विदुर जी यहाँ आ पहुँचे हैं, वे आपके चरणों का दर्शन करना चाहते हैं। मुझे आज्ञा दीजिये, उन्हें क्या कार्य बताया जाय।
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