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विदुर नीति • अध्याय 1 • श्लोक 36
स्वमर्थं यः परित्यज्य परार्थमनुतिष्ठति । मिथ्या चरति मित्रार्थे यश्च मूढः स उच्यते ॥
जो अपना कर्तव्य छोड़कर दूसरे के कर्तव्य का पालन करता है, तथा मित्र के साथ असत् आचरण करता है; वह मूर्ख कहलाता है।
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