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विदुर नीति • अध्याय 1 • श्लोक 34
श्रुतं प्रज्ञानुगं यस्य प्रज्ञा चैव श्रुतानुगा । असम्भिन्नार्य मर्यादः पण्डिताख्यां लभेत सः ॥
जिसकी विद्या बुद्धि का अनुसरण करती है, और बुद्धि विद्या का तथा, जो शिष्ट पुरुषो की मर्यादा का उल्लंघन नहीं करता, वही पण्डित की पदवी पा सकता है।
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