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विदुर नीति • अध्याय 1 • श्लोक 28
नाप्राप्यमभिवाञ्छन्ति नष्टं नेच्छन्ति शोचितुम् । आपत्सु च न मुह्यन्ति नराः पण्डित बुद्धयः ॥
पण्डितों जैसी बुद्धि रखने वाले मनुष्य, दुर्लभ वस्तु की कामना नहीं करते, खोयी हुई वस्तु के विषय में शोक करना नहीं चाहते, और विपत्ति में पड़कर घबराते नहीं हैं।
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