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विदुर नीति • अध्याय 1 • श्लोक 2
प्रहितो धृतराष्ट्रेण दूतः क्षत्तारमब्रवीत् । ईश्वरस्त्वां महाराजो महाप्राज्ञ दिदृक्षति ॥
धृतराष्ट्र का भेजा हुआ बह दूत, जाकर विदुर से बोला, महामते! हमारे स्वामी महाराज धृतराष्ट्र, आपसे मिलना चाहते हैं।
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