प्रदायैषामुचितं तात राज्यं सुखी पुत्रैः सहितो मोदमानः ।
न देवानां नापि च मानुषाणां भविष्यसि त्वं तर्कणीयो नरेन्द्र ॥
तात! उन्हें उनका न्यायोचित राज्यभाग देकर, आप अपने पुत्रो के साथ आनन्द भोगिये। नरेन्द्र! ऐसा करने पर आप देवता, या मनुष्यों की टीका-टिप्पणी के विषय नहीं रह जायेगे।
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